प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन, ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए सवाल
सहारनपुर : कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। AIMIM के नेताओं और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सहारनपुर पहुंचकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कमिश्नर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पार्टी के प्रदेश महासचिव समीम अहमद और प्रवक्ता एवं अधिवक्ता शादाब चौहान ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि मस्जिद को गिराने की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई। उनका दावा है कि जिस आदेश का हवाला देकर ध्वस्तीकरण किया गया, उसमें सीधे तौर पर मस्जिद गिराने का उल्लेख नहीं था। उन्होंने कहा कि प्रभावित पक्ष को कानूनी उपचार के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक अंतिम कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और कानूनी विकल्प अपनाने का अवसर मिलना चाहिए।
शादाब चौहान ने मस्जिद की पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि करीब 100 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। उन्होंने 1960 में मस्जिद से संबंधित कथित लीज का हवाला देते हुए जमीन के मालिकाना हक पर भी सवाल उठाए। AIMIM नेता ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया कि जमीन को सरकार के अधीन लेने, अधिग्रहित करने या उसके लिए भुगतान किए जाने से जुड़े पर्याप्त प्रमाण मौजूद नहीं हैं। हालांकि, इन दावों पर प्रशासन का पक्ष अलग हो सकता है।
Places of Worship Act का भी उठाया मुद्दा
AIMIM ने Places of Worship Act, 1991 का मुद्दा भी उठाया। शादाब चौहान ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में इस कानून के प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मस्जिदों को लेकर हो रही कार्रवाई एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए शादाब चौहान ने कहा कि सहारनपुर में सांसद और दो विधायक होने के बावजूद मस्जिद को नहीं बचाया जा सका। उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों की नाकामी बताया। इसी दौरान उन्होंने कहा, “हमारे विधायक होते तो मस्जिद में ही लेट जाते, मस्जिद नहीं गिरने देते।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले कुछ जनप्रतिनिधियों ने मामले को अफवाह बताया था, लेकिन बाद में मस्जिद का ध्वस्तीकरण कर दिया गया। AIMIM ने सवाल किया कि जब जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जनता की आवाज उठाना है तो कार्रवाई के समय उनकी सक्रिय भूमिका क्यों नजर नहीं आई।
कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का ऐलान
मस्जिद के नीचे कुएं जैसी संरचना मिलने को लेकर चल रही चर्चा पर भी AIMIM ने सवाल उठाए। शादाब चौहान ने कहा कि किसी पुराने निर्माण के आसपास कुआं या अन्य संरचना मिलना अपने आप में किसी धार्मिक दावे का प्रमाण नहीं है।
उन्होंने कहा कि AIMIM इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी के अधिवक्ता पूरे मामले का कानूनी अध्ययन करेंगे और उपलब्ध कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करेंगे। ओवैसी के निर्देश और पार्टी नेतृत्व के फैसले के अनुसार मामले को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
अब सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद में राजनीतिक बयानबाजी के साथ कानूनी लड़ाई भी तेज होती दिखाई दे रही है। AIMIM के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर नए सवाल उठे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और अदालत में मामले को लेकर आगे क्या रुख सामने आता है।

